Jain Diksha Mahotsav

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पूरा परिवार 1 मई को लेगा संन्यास

करोड़ों रुपए की अचल संपत्ति, सालाना चार करोड़ रुपए टर्न ओवर का टैक्सटाइल ट्रेडिंग का बिजनेस और भरा-पूरा परिवार छोड़कर संन्यास का निर्णय, वह भी महज 32 वर्ष की उम्र में। यह निर्णय है पाली निवासी मनोज डाकलिया का। उनसे भी बड़ा निर्णय उनकी 30 वर्षीय पत्नी का, जिन्होंने सभी सुख-सुविधाएं छोड़कर संयम पथ पर जाने का फैसला किया। यहां तक भी ठीक है। डाकलिया दंपती की दो संतानें भी माता-पिता की राह ही चुनेंगी।
बेटा है आठ वर्ष का। नाम- भव्य। जैसा नाम वैसा ही निर्णय। और बेटी खुशी, उम्र 12 वर्ष। वह भी ठीक अपने नाम की तरह खुशी से उस राह पर चल पड़ी जो बड़े-बड़े संयमी लोगों के लिए सहज नहीं है। यह पूरा परिवार 1 मई को दीक्षा ग्रहण कर संयम पथ चुनेगा। इसके लिए करीब तीन माह पूर्व ही पिता ने व्यवसाय और संपत्ति का त्याग कर दिया तो बेटे-बेटी ने औपचारिक स्कूली शिक्षा का। पूरा परिवार अब जैन धर्म के सिद्धांतों की पढ़ाई कर रहा है। मनोज डाकलिया ने दस वर्ष पूर्व अपने गुरु जयानंद महाराज की प्रेरणा से ही संयम पथ पर चलने का संकल्प ले लिया था। इसके बाद वे अपना सांसारिक जीवन भले ही जीते रहे लेकिन लगातार दीक्षा की इच्छा प्रबल होती गई। परिजनों व परिचितों ने खूब समझाया, पर मन में एक ही लक्ष्य बस संयम की राह अपनाने का। उनके इस निर्णय में पहले पत्नी मोनिका शामिल हुई। फिर बेटी और अंत में बेटा। गुजराती कटला निवासी यह डाकलिया 1 मई को दीक्षा ग्रहण करेगा। दीक्षा कार्यक्रम की शुरुआत 26 अप्रैल से हो जाएगी। इसको लेकर जैन समाज के लोग अभी से ही तैयारियों में जुट गए हैं।
भाई सपरिवार अमेरिका में सैटल हैंत्न मनोज के पिता गौतमचंद डाकलिया ने बताया कि उनका छोटा बेटा जितेंद्र अमेरिका में पत्नी और दो बच्चों के साथ सैटल है। जितेंद्र वहां एक सॉफ्टवेयर कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।
भरा-पूरा परिवार और करोड़ों की संपत्ति
गौतमचंद ने बताया कि वे मूलत: ब्यावर के रहने वाले हैं। ब्यावर में आज भी उनका पैतृक मकान है। वहां उनके परिजन रहते हैं। 35 वर्ष पूर्व बिजनेस के लिए पाली आकर बस गए थे। यहां बड़ा सा मकान है और बाजार में एक दुकान है। दीक्षा की तारीख तय होने से पूर्व ही मनोज ने अपना टैक्सटाइल ट्रेडिंग का कारोबार बंद कर दिया। वह अब केवल अपने परिवार के साथ प्रभु के ध्यान में एक-एक क्षण बिता रहे हैं। मनोज ने बताया कि टैक्सटाइल कारोबार उनका करीब चार करोड़ रुपए सालाना का टर्नओवर था। शादी से पहले ही वे संयम पथ धारण करने का विचार बना चुके थे। लेकिन सगाई हो गई और फिर शादी। उनकी पत्नी भी सगाई के बाद से दीक्षा का निर्णय कर चुकी थी। लेकिन उस समय तक हमें योग्य गुरु नहीं मिले थे। मनोज कहते हैं कि मैं और मेरा परिवार जैन संत जयानंद मुनि, साध्वी अनुभवश्री और प्रभाश्री का आभारी हूं। उन्हीं की प्रेरणा से हमने संयम पथ पर चलने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही घर में धर्म-कर्म का माहौल ही बना रहा। माता का भी धर्म के प्रति अटूट प्रेम है।
बच्चों ने छोड़ी स्कूल और अब पढ़ रहे जैन दर्शन शास्त्र
मई में अपने माता-पिता के साथ दीक्षा लेने वाले आठ साल के बेटे भव्य व बारह वर्षीया खुशी ने तीन माह पूर्व ही स्कूल छोड़ दिया। हालांकि अगले महीने होने वाली परीक्षा वे जरूर देंगे। इसकी तैयारी कराने के लिए दोनों को घर पर ही पढ़ाने के लिए ट्यूटर आते हैं। वे अब धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं। भव्य व खुशी की मां मोनिका ने बताया कि दोनों बच्चे एडी डागा स्कूल में पढ़ते थे। अब चारों चेन्नई से जैन दर्शन पर आधारित जैनोलॉजी की परीक्षा के विद्यार्थी हैं। इस परीक्षा के 6 चरण होते हैं। इस परीक्षा में खुशी ने प्रथम चरण मे 89 व चरण में 92 फीसदी अंक अर्जित कर परीक्षा उत्तीर्ण की हैं। भव्य इस वर्ष जैनोलॉजी की परीक्षा देगा। पति के साथ उन्होंने ने भी इस परीक्षा के दो चरण उत्तीर्ण किए हैं।
ठ्ठ दस वर्ष पहले ही गुरु से मिली प्रेरणा के बाद निश्चय कर लिया था, बच्चे छोटे थे इसलिए किया इंतजार, अब बेटे और बेटी ने भी स्वेच्छा से किया निर्णय, तीन माह पहले ही पिता ने व्यवसाय और संपत्ति का त्याग किया तो उन्होंने भी स्कूल छोड़ दी
, अबपूरा परिवार जैन धर्म के सिद्धांतों की पढ़ाई कर रहा है
ठ्ठ डाकलिया ने त्यागा चार करोड़ रुपए सालाना का टैक्सटाइल ट्रेडिंग का व्यवसाय, आलीशान मकान, कार और भौतिक सुख-सुविधाएं, उनके भाई अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, परिवार सहित वहीं रहते हैं, माता-पिता यहीं उनके साथ रहते थे
ठ्ठ पाली निवासी 32 वर्षीय कपड़ा व्यवसायी मनोज डाकलिया के चार सदस्यीय परिवार ने चुनी संयम पथ की राह, दीक्षार्थी परिवार में 8 वर्षीय बेटा भव्य और 12 वर्षीय बेटी खुशी भी शामिल, पाली में यह पहला मौका होगा जब पूरा परिवार दीक्षा ग्रहण करेगा
> पाली का डाकलिया परिवार वैराग्य के पथ पर अग्रसर हो रहा है। सांसारिक जीवन और सुख-सुविधाएं त्यागकर जैन दर्शन में समाहित तपस्या को आत्मसात कर यह परिवार एक मई को संयम और साधना के पथ पर आगे बढ़ेगा। पाली के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि पूरा परिवार ही दीक्षा ग्रहण कर रहा है।
सालाना चार करोड़ टर्न ओवर का व्यवसाय, भरा-पूरा परिवार और सुख-सुविधाएं, सब कुछ त्यागकर सपरिवार लेंगे संयम पथ की दीक्षा